मकर संक्रांति कब और क्यों ....

14 जनवरी को सूर्य मकर राशि में सूर्य उदय के समय से , सूर्य अस्त होने के बाद तक नहीं आ रहा है, मकर संक्रांति के पर्व के लिए आवश्यक है कि सूर्य का प्रवेश मकर राशि में होना चाहिए, तभी दान का पुण्य मिलता है, अतः मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाया जाना चाहिए। जरूरी नहीं है कि सभी मेरे विचार से सहमत हों, लेकिन मैं प्रमाणिकता के आधार पर पर ही कुछ बोलता हूँ । आप सभी के समक्ष दिनांक 14 और 15 जनवरी का ग्रह गोचर प्रमाणिकता हेतु प्रस्तुत कर रहा हूँ, आप खुद भी देख सकते हैं। 15 जनवरी को सुबह 6.

जन्म कुंडली और स्वयं के मकान बनाने के योग

किसी भी व्यक्ति के जीवन में अपना मकान होना बहुत बड़ा सपना होता है जिसके लिए वह रात-दिन मेहनत करता है। मकान अथवा भवन जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं में से एक माना जाता रहा है। जन्म लेने से मरण तक व्यक्ति की तीन मूलभूत आवश्यकताएं कही गई हैं जिनमें रोटी, कपड़ा व मकान प्रमुख है। एक अच्छा घर बनाने की इच्छा हर व्यक्ति के जीवन की चाह होती है. व्यक्ति किसी ना किसी तरह से जोड़-तोड़ कर के घर बनाने के लिए प्रयास करता ही है. कुछ ऎसे व्यक्ति भी होते हैं जो जीवन भर प्रयास करते हैं लेकिन किन्हीं कारणो से अपना घर फिर भी नहीं बना पाते हैं.

नहाने का वैज्ञानिक तरीका

क्या आपने कभी अपने आस पास ध्यान से देखा या सुना है कि नहाते समय बुजुर्ग को लकवा लग गया?

दिमाग की नस फट गई ( ब्रेन हेमरेज), हार्ट अटैक आ गया |

छोटे बच्चे को नहलाते समय वो बहुत कांपता रहता है, डरता है और माता समझती है की नहाने से डर रहा है,

लेकिन ऐसा नहीँ है; असल मे ये सब गलत तरीके से नहाने से होता है ।

दरअसल हमारे शरीर में गुप्त विद्युत् शक्ति रुधिर (खून) के निरंतर प्रवाह के कारण पैदा होते रहती है, जिसकी स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक दिशा ऊपर से आरम्भ होकर नीचे पैरो की तरफ आती है।

सर में बहुत महीन रक्त् नालिकाये होती है जो दिमाग को रक्त पहुँचाती है।

प्रेम विवाह व ज्योतिष

ये शब्द हर मनुष्य के मन को एक सुखद एहसास ,एक
रूमानी दशा से दो चार करता आया है।तो आइये आज
इसी विषय पर चर्चा करने का प्रयास करते हैं।
आम बोलचाल की भाषा के प्रेम विवाह व ज्योतिष
शास्त्रानुसार प्रेम विवाह में फर्क
होता है,होना भी चाहिए और अधिक आवश्यक है
की जातक व ज्योतिषी दोनों को इस फर्क
का पता होना चाहिए।कालांतर में प्रेमविवाह के अर्थ बदलते रहे
हैं।आज जो हो रहा है वो प्रेम विवाह
नहीं है,आपसी समझौता है अपने
जीवन को सुगम बनाने के लिए।आज से तीस
चालीस साल पहले जब
जाती प्रथा का ठीक ठाक बोलबाला था ,तब

कुलदेवी कृपा प्राप्ति साधना

ज्यादा चिंता उन्हेही ही होती है
। कुलदेवी कि कृपा से कई जीवन के येसे
कार्य है जिनमे पूर्ण सफलता मिलती है । कई लोग येसे
है जिन्हें
अपनी कुलदेवी पता ही नहीं और
कुछ येसे भी है जिन्हें कुलदेवी पता है
परन्तु उनकी पूजा या फिर
साधना पता नहीं है । तो येसे समय यह
साधना बड़ी ही उपयुक्त है । यह
साधना पूर्णतः फलदायी है और गोपनीय है ।
यह दुर्लभ विधान मेरी प्यारी गुरुभाई/बहन
कि लिए आज सदगुरुजी कि कृपा से हम
सभी के लिये ।
इस साधना के माध्यम से घर मे क्लेश चल
रही हो या कोई
चिंता हो या बीमारी हो या धन

राहु चन्द्र हमेशा चिन्ता का योग बनाते हैं

बीमारी या काम काज की चिन्ता लगी रहती
है,महिलाओं को अपनी सास या ससुराल खानदान के
साथ बन्धन की चिन्ता लगी रहती है।
राहु और चन्द्रमा का एक साथ रहना हमेशा से देखा
गया है, कुन्डली में एक भाव के अन्दर दूरी चाहे २९ अंश
तक क्यों न हो,वह फ़ल अपना जरूर देता है।
इसलिये राहु जब भी गोचर से या जन्म कुन्डली की
दशा से एक साथ होंगे तो जातक का चिन्ता का
समय जरूर सामने होगा

 

 

 

नित्य पूजा कैसे करें.......,.

नित्य पूजा पाठ के नियम ------------------- कई बार लोग प्रश्न करते हैं कि घर में नियमित पूजा-पाठ किस तरह की जाये और किस भगवान की पूजा की जाये शुद्ध आसन पर बैठकर प्रातः और संध्या को पूजा अर्चना करने को नित्य नियम कहते हैं पाठ का क्रम इस तरह से होना चाहिए :- 1. सर्वप्रथम गणेश जी की उपासना:- विघ्नों को दूर करने के लिए 2 . सूर्य भगवान की उपासना:- स्वास्थ्य के लिए 3 . माँ भगवती की उपासना :- शक्ति के लिए 4 . भगवान शंकर की उपासना:- भक्ति के लिए और सभी प्रकार के शारीरिक और मानसिक कष्ट और विपदाओं से निवारण के लिये 5 .

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