शनि अमावस्या पूजा विधि

शनि न्याय के देवता हैं। वे सूर्य पुत्र एवं यमराज के भ्राता हैं। अपनी दशा साढ़ेसाती आदि में किए गए कर्म के भले या बुरे फल देते हैं। शनि महाराज की शांति या प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए किए जाने वाले उपायों के अलावा निम्नलिखित उपाय करने से अपने दु:ख दूर किए जा सकते हैं। शनिवार के दिन तथा शनि अमावस्या के अवसर पर इन उपायों को करने से कई गुना ज्यादा फल प्राप्त होते हैं।

 

नव वर्ष की पहली शनि अमावस्या

ग्राम मऊसहानियां में स्थित श्री शनि मंदिर में नववर्ष 2019 के पहले शनिवार 5 जनवरी को पड़ने वाली शनि अमावस्या पर भव्य धामिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजन की सभी तैयारियां शनिधाम सेवा संस्थान द्वारा पूरी कर ली गई हैं। आयोजन समिति द्वारा शनि अमावस्या श्रृद्धा पूर्वक हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी। अमावस्या पर मंदिर में स्थित नव ग्रहों का अभिषेक, शिव परिवार का अभिषेक, हवन पूजन करके दिनभर प्रसाद वितरण किया जाएगा। शाम 7 बजे शनि देव की महाआरती की जाएगी, महाआरती में क्षेत्र के कोने कोने से आए शनि भक्त शामिल होंगे। 

मूल और गंण्ड योग और उपाय

मूल शान्ति कैसे करे शास्त्रों की मान्यता है कि संधि क्षेत्र हमेशानाजुक और अशुभ होते हैं। जैसे मार्ग संधि (चौराहे- तिराहे), दिन-रात का संधि काल, ऋतु, लग्न औरग्रह के संधि स्थल आदि को शुभ नहीं मानते हैं। इसीप्रकार गंड-मूल नक्षत्र भी संधि क्षेत्र में आने सेनाजुक और दुष्परिणाम देने वाले होते हैं। शास्त्रों केअनुसार इन नक्षत्रों में जन्म लेने वाले बच्चों केसुखमय भविष्य के लिए इन नक्षत्रों की शांतिजरूरी है। मूल शांति कराने से इनके कारण लगने वाले दोष शांत हो जाते हैं। क्या हैं गंड मूल नक्षत्र राशि चक्र में ऎसी तीन स्थितियां होती हैं, जबराशि और नक्षत्र दोनों एक साथ समाप्त होते हैं। यह स्थिति “गंड नक

संसार में रहकर गृहस्थ जीवन

संसार में रहकर गृहस्थ जीवन

संसार में रहकर गृहस्थ जीवन का यापन करने के लिए सुख-समृद्धि एवं धन का होना अत्यन्त अवश्यक है। इसके अभाव में घर गृहस्थी की कल्पना भी नहीं की जा सकती। कुछ टोने-टोटके अपनाने से जीवन में धन, यश, मान, पद, प्रतिष्ठा, और एैश्वर्य की अभिवृद्धि होती है। ऐसा करने से निश्चय ही अतुलनीय धन और एेश्वर्य का स्वामी बना जा सकता है।
1. पूर्णिमा को प्रातकाल पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करें।
2. तुलसी मां के पौधे पर बृहस्पतिवार को कच्ची लस्सी अर्पित करें।
3. बरगद के पेड़ के नीचे कोई पौधा उगा हो तो उसे प्रणाम करके उखाड़े और अपने घर पर पवित्र स्थान पर लगा लें।

अंक ज्योतिष के अनुसार निन्म उपाय करे

अंक ज्योतिष

मूलांक ५ – श्री हरी विष्णु का पूजन करे और महीने में एक बुधवार को साबुत मुंग का दान करे
मूलांक ६ – आशुतोष शिव का पूजन करे और महीने में एक बार बुधवार को गाय को हरा चारा डाले 
मूलांक ७ - हररोज शिवलिंग पर जलाभिषेक करे और हर मंगलवार को सफ़ेद तिल का दान करे 
मूलांक ८ – श्री कृष्ण का पूजन करे और महीने के हर शनिवार को साबुत मुंग का दान करे
मूलांक ९ - श्री भैरव का पूजन करे और महीने में हर मंगलवार को मसूर की दाल का दान

 

 

 

नवरात्र कलश स्थापना मुहूर्त

यह तो आप सब जानते हो की नवरात्र साल में २ बार आते है ! एक तो चैत्र शुक्ल के और दुसरे आश्विन शुक्ल के शारदीय नवरात्र ! नवरात्र का पर्व पुरे नो दिन मनाया जाता है इन दिनों श्री दुर्गा माँ के नो रूपों की पूजा होती है ! इसी नवदुर्गा और नो दिन की पूजा के कारन इससे नवरात्र कहा जाता है यदि जो कोई भी व्यक्ति नो दिनों तक सच्चे मन से श्री दुर्गा माँ उपासना करता है उसके सारे विघ्न का नाश होता है और सारे कष्ट दूर हो जाते है नवरात्र के उपवास वैसे तो सबके लिए फलदायक है पर यह विशेष रूप से कन्याओ के लिए और विशेष फलदायक है !!

ग्रह, आर्थिक, विवाह-बाधा-निवारण प्रयोग

करने पर सभी प्रकार की बाधाओं का निवारण
होता है एवं कामना-पुर्ति होती है।
२॰ किसी शनिवार को, यदि उस दिन 'सर्वार्थ-
सिद्धि योग' हो, तो और भी उत्तम, सांय-काल
अपनी लम्बाई के बराबर लाल रेशमी सूत नाप ले। फिर
एक पत्ता बरगद का तोड़े। उसे स्वच्छ जल से धो-कर
पोंछ ले। तब पत्ते को बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें।
इस प्रयोग से सभी प्रकार की बाधाएँ दूर होती है
और कामनाओं की पुर्ति होती है।
३॰ रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र में, एक काला कौआ
या काला कुत्ता पकड़े। उसके दाएँ पैर का नाखून
काटें। इस नाखून को ताबीज में भर कर, धूप-दीपादि

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