तलाक क्यों हो जाता है?

तलाक

(१)- यदि कुंडली मांगलीक होगी तो विवाह होकर भी तलाक हो जाता है. किन्तु ध्यान रहे किसी भी हालत में सप्तमेश को वर्गोत्तम नहीं होना चाहिए.
(२)- दूसरे भाव का स्वामी यदि नीचस्थ लग्नेश के साथ मंगल अथवा शनि से देखा जाता होगा तो तलाक हो जाएगा. किन्तु मंगल अथवा शनि को लग्नेश अथवा द्वितीयेश नहीं होना चाहिए.
(३) यदि जन्म कुंडली का सप्तमेश सप्तमांश कुंडली का अष्टमेश हो अथवा जन्म कुंडली का अष्टमेश सप्तमांश कुंडली का लग्नेश हो एवं दोनों कुंडली में लग्नेश एवं सप्तमेश अपने से आठवें घर के स्वामी से देखे जाते हो तो तलाक निश्चित होगा.

शनि देव कब अच्छे और कब बुरे हो जाते हैं।

शनि देव कब अच्छे और कब बुरे हो जाते हैं।

जब कुंडली में शनि देव के साथ सूर्य का सम्बन्ध बन जाये तो शनि का फल अच्छा नहीं होता।
शनि जब अपनी नीच राशि मेष में हो तब भी शनि के फल मन्दे हो जाते हैं।
और जब शनि किसी की कुंडली में लग्न में हों और 7 और 10 घर में कोई ग्रह हो तो भी शनि के बुरे फल के हो जाते हैं।
शनि देव जिसकी कुंडली में अच्छे ना हों उसको साढेसाती में बहुत परेशानी होती है।उस समय वो धनी मानी व्यक्ति की अकड़ भी ढीली कर उसे सही रास्ते पर चलने के लिए मजबूर कर देते हैं।
ऐसा व्यकित जब तक झुकना ना सीख़ जाये
तब तक शनि उसको परेशान करते हैं 

विष्णुपुराण अट्ठारह पुराणों में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण तथा प्राचीन है।

विष्णुपुराण अट्ठारह पुराणों में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण तथा प्राचीन है। यह श्री पराशर ऋषि द्वारा प्रणीत है। यह इसके प्रतिपाद्य भगवान विष्णु हैं, जो सृष्टि के आदिकारण, नित्य, अक्षय, अव्यय तथा एकरस हैं। इस पुराण में आकाश आदि भूतों का परिमाण, समुद्र, सूर्य आदि का परिमाण, पर्वत, देवतादि की उत्पत्ति, मन्वन्तर, कल्प-विभाग, सम्पूर्ण धर्म एवं देवर्षि तथा राजर्षियों के चरित्र का विशद वर्णन है। भगवान विष्णु प्रधान होने के बाद भी यह पुराण विष्णु और शिव के अभिन्नता का प्रतिपादक है। विष्णु पुराण में मुख्य रूप से श्रीकृष्ण चरित्र का वर्णन है, यद्यपि संक्षेप में राम कथा का उल्लेख भी प्राप्त होता है।

वेदान्त’ का अर्थ

वेदान्त’ का शाब्दिक अर्थ है ‘वेदों का अन्त’। आरम्भ में उपनिषदों के लिए ‘वेदान्त’ शब्द का प्रयोग हुआ किन्तु बाद में उपनिषदों के सिद्धान्तों को आधार मानकर जिन विचारों का विकास हुआ, उनके लिए भी ‘वेदान्त’ शब्द का प्रयोग होने लगा। उपनिषदों के लिए 'वेदान्त' शब्द के प्रयोग के प्रायः तीन कारण दिये जाते हैं :-

(1) उपनिषद् ‘वेद’ के अन्त में आते हैं। ‘वेद’ के अन्दर प्रथमतः वैदिक संहिताएँ- ऋक्, यजुः, साम तथा अथर्व आती हैं और इनके उपरान्त ब्राह्मण, आरण्यक तथा उपनिषद् आते हैं। इस साहित्य के अन्त में होने के कारण उपनिषद् वेदान्त कहे जाते हैं।

वेदान्त ज्ञानयोग की एक शाखा है

वेदान्त ज्ञानयोग की एक शाखा है जो व्यक्ति को ज्ञान प्राप्ति की दिशा में उत्प्रेरित करता है। इसका मुख्य स्त्रोत उपनिषद है जो वेद ग्रंथो और अरण्यक ग्रंथों का सार समझे जाते हैं। उपनिषद् वैदिक साहित्य का अंतिम भाग है, इसीलिए इसको वेदान्त कहते हैं। कर्मकांड और उपासना का मुख्यत: वर्णन मंत्र और ब्राह्मणों में है, ज्ञान का विवेचन उपनिषदों में। 'वेदान्त' का शाब्दिक अर्थ है - 'वेदों का अंत' (अथवा सार)।

धर्म को वेदकाल से भी पूर्व का माना जाता है,

हिन्दू धर्म का इतिहास अति प्राचीन है। इस धर्म को वेदकाल से भी पूर्व का माना जाता है, क्योंकि वैदिक काल और वेदों की रचना का काल अलग-अलग माना जाता है। यहां शताब्दियों से मौखिक परंपरा चलती रही, जिसके द्वारा इसका इतिहास व ग्रन्थ आगे बढ़ते रहे। उसके बाद इसे लिपिबद्ध करने का काल भी बहुत लंबा रहा है। हिन्दू धर्म के सर्वपूज्य ग्रन्थ हैं वेद। वेदों की रचना किसी एक काल में नहीं हुई। विद्वानों ने वेदों के रचनाकाल का आरंभ ४५०० ई.पू.

सूर्य एक माह के लिए कर गया मकर राशि में प्रवेश, इस राशि वालों को करेगा परेशान

आज से यानी की 14 जवनरी सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर गया है। जो कि इस राशि में 13 फरवरी तक रहेगा। इसके साथ ही यह अपने शत्रु राशि मिथुन, सिंह, तुला, मकर कुंभ और मीन को परेशान करेगा।  जिसके कारण इस राशि वाले जातकों को की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। फालतू खर्च होने से आपका दिमाग खराब और टेंशन होगी। लेन-देन और निवेश के मामलों में संभलकर रहें। नौकरीपेशा लोग कामकाज को लेकर लापरवाही न करें। लवलाइफ में पार्टनर से थोड़ा मनमुटाव हो सकता है। इसलिए कोई भी समस्या हो उसे आराम से हल करने की कोशिश करें। नहीं तो वह बड़ा रुप ले सकती है। ये भी पढ़े- 15 जनवरी को करें राशिनुसार ये काम, श्री गणेश बरसाएं

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