मकर संक्रांति के दिन सुबह से ही करें स्नान और दान, होगा लाभ

हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का बहुत अधिक महत्व है। इस दिन दान देने से सौ गुना अधिक फल मिलता है। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में जाता है जिसके कारण इस दिन मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। इसे उत्तरायण भी कहा जाता है। इस बार मकर संक्रांति में 28 साल बाद बहुत ही अच्छा संयोग है। जिसके कारण इस दिन दान-पुण्य करने से कई गुना अधिक फल मिलेगा। इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी, शनिवार को है। ये भी पढ़े- रामचरितमानस: कभी न करें ऐसे व्यक्तियों से इस तरह की बातें, होगा आपका ही नुकसान आपकी पत्नी में है ये गुण, तो बदल जाएगी आपकी किस्मत पाना है लाइफ में हमेशा सक्सेस, तो याद रखें गौतम बुद्ध

तो इस कारण हिंदू धर्म में शाम को शादी करना माना जाता है शुभ

तो इस कारण हिंदू धर्म में शाम को शादी करना माना जाता है शुभ

हिंदू धर्म हो या फिर कोई भी धर्म। हर धर्म में अपने अनुसार पूजा-पाठ, शादी आदि किए जाते है। शादी ही एक ऐसा अवसर होता है। जहां पर केवल दो इंसान ही एक दूसरे के नहीं होते है बल्कि दो परिवारों के बीच भी रिश्ता होता है। ऐसा रिश्ता जो कि हर दुख-सुख के साथी बनते है। इस रिश्तें की शुरुआत शादी से होती है। जिसमें कुंडली का मिलान, शुभ मुहूर्त आदि देखे जाते है।

 

आपका नया साल शुक्रवार करें ये उपाय, दूर होगा शुक्र का दोष बुधवार को करें ये उपाय, हर काम में मिलेगी सफलता जिसके बाद ही सावधानी के साथ विवाह किया जाता है। जिससे कि बाद में दंपत्ति को किसी भी प्रकार की समस्या न हो।

साल 2017: मीन राशि वालों के लिए कुछ ऐसा रहेगा नया साल

मीन राशि का स्वामी ग्रह गुरु है। गुरु बुद्धि, विवेक तथा ज्ञान के कारक ग्रह हैं। इसलिए आप एक अच्छे सलाहकार अथवा अध्यापक भी हो सकते हैं। आप लेखन व संपादन कार्य में भी कुशल होते हैं, इसके अलावा आप धर्म प्रचारक के रूप में भी कार्य कर सकते हैं। आप फिल्म, मनोरंजन अथवा जासूसी के क्षेत्र में भी काम कर सकते हैं। आप चिकित्सक के रूप में भी अपना व्यवसाय चुन सकते हैं। करियर के नजरिए से नया साल करियर की दृष्टि  से यह वर्ष  शानदार रहेगा। आपके करियर के खाने में राजयोग बन रहा है। जन्म पत्रिका में करियर का आकलन 10 वे घर से किया जाता है। इस वर्ष प्रवेश के समय आपके करियर का मालिक बृहस्पति जन्मपत्रिका के सातवें

एकाग्रता

एकाग्रता एवं समर्पण से ही कोई व्यक्ति मेधावी बनता है। मेधावी बनने के लिए सघन एकाग्रता की आवश्यकता होती है। न्यूटन ने कहा था,"यदि मैंने विज्ञान के क्षेत्र में कुछ भी हासिल किया है तो इसका सबसे ज्यादा श्रेय धर्यपूर्ण एकाग्रता को जाता है।"एकाग्रता सफलता का एक रहस्य है। दुनिया की सारी उपलब्धियां चाहे वह कला, विज्ञान, साहित्य या सैन्य क्षेत्र में हों, ये सभी एकाग्रता कीशक्ति पर आधारित हैं। एकाग्रता का मतलब है किसी व्यक्ति की सारी शारीरिक एवं मानसिक ऊर्जा का उस चीज पर टिक जाना जो उसे करना है या कर रहा है।इसके लिए आवश्यक है कि आप उन चीजों को अपने दिमाग से बाहर रखें जिनसे आपका सरोकार नहीं है। इस तर

दूध से करें ये छोटे से उपाय, होगी पैसो की वर्षा

हिंदू धर्म में चंद्रमा को भगवान के रुप में माना जाता है। माना जाता है कि अगर आपको चंद्रमा खराब है, तो उपाय करने से आपके ऊपर उनकी दया जरुर बनती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार माना जाता है कि दूध चंद्रमा का कारक है। जिस तरह शिवलिंग में दूध अर्पित करने से सभी ग्रहों का अशुभ फल खत्म हो जाता है। वहीं राहु के बुरे प्रभाव को खत्म करने के लिए सांप को दूध पिलाना अच्छा माना जाता है। इसी तरह कई उपाय है। जिन्हें थोड़े से दूध के द्वारा करने पर आपको धन-धान्य, बल-बुद्धि की प्राप्ति होगी। हर काम में सफलता भी प्राप्त होगी। इतना ही नहीं दूध का कई उपाय करने से आपके घर लक्ष्मी का वास भी हो जाता है।

 

मृत्युंजय मंत्र का जाप हर मनुष्य को करना चाहिऐ

मृत्युंजय मंत्र का जाप हर मनुष्य को करना चाहिऐ

ॐ भगवान शिव के मृत्युंजय मंत्र का जाप हर मनुष्य को करना चाहिऐ!
महामृत्युंजय मंत्र के 33 अक्षर हैं जो महर्षि वशिष्ठ के अनुसार 33 कोटि(प्रकार) के देवताओं
के घोतक हैं।
महामृत्युंजय मन्त्र से शिव की आराधना करने
पर समस्त देवी देवताओं की आराधना स्वमेव
हो जाती है।
उन तैंतीस कोटि देवताओं में 8 वसु 11 रुद्र और
12 आदित्य 1 प्रजापति तथा 1 षटकार हैं।
इन तैंतीस कोटि देवताओं की सम्पूर्ण शक्तियाँ
महामृत्युंजय मंत्र से निहीत होती है,
जिससे महा महामृत्युंजय का पाठ करने वाला
प्राणी दीर्घायु तो प्राप्त करता ही हैं।

क्यों नहीं देखते है भादों चतुर्थी का चंद्रमा

क्यों नहीं देखते है भादों चतुर्थी का चंद्रमा

आप भी जानें :पौराणिक कथानुसार जब श्री गणेश जी सत्यलोक से विचरते हुए चंद्रलोक पहुंचे तब वहां रूपवान चंद्रमा को श्री गणेश जी का व्यक्तित्व बहुत ही हास्यापद लगा उनकी बढ़ी हुयी तोंद, लम्बी सूंड और बड़े बड़े दांत इत्यादि देखकर अपने रूप पर गर्वित चन्द्र देव उन पर हंस पड़े l इस पर गणपति चंद्रमा पर कुपित हो गए और श्राद दे डाला कि जो भी शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को तुम्हें देखेगा वो कलंकित हुए बगैर नहीं रहेगा l श्राप सुनकर चंद्रमा का मुख मलिन हो गया और वो जल में प्रवेश कर वहीँ निवास करने लगे l सभी देव,ऋषि और गन्धर्व दुखी और चिंतित होकर ब्रह्मा जी के पास गए उन्हें चन्द्रमा के शाप के बारे में सुना कर शाप मुक्

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